कलयुग की शुरुआत का वर्णन प्राचीन भारतीय ग्रंथों और पुराणों में किया गया है। हिंदू धर्म के अनुसार, समय को चार युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलयुग) में विभाजित किया गया है। कलयुग चौथा और अंतिम युग है।कलयुग की शुरुआत का उल्लेख विशेष रूप से “महाभारत” और “भगवद पुराण” में मिलता है। महाभारत के युद्ध के बाद और भगवान कृष्ण के पृथ्वी छोड़ने के बाद कलयुग की शुरुआत मानी जाती है। यह समय लगभग 3102 ईसा पूर्व का माना जाता है।
कलयुग की विशेषताएँ:
धर्म का ह्रास: इस युग में धर्म, सत्य, और नैतिकता का पतन होता है।
पाप और अधर्म का बढ़ना: पाप, अधर्म, और अन्याय बढ़ते हैं।
आयु का घटाव: लोगों की आयु और जीवन की गुणवत्ता घट जाती है।
प्रभुत्व का परिवर्तन: राजा और नेता अधिक स्वार्थी और अत्याचारी हो जाते हैं।
स्रोत
महाभारत: महाभारत के अनुसार, भगवान कृष्ण की मृत्यु के बाद कलयुग की शुरुआत होती है।
भगवद पुराण: भगवद पुराण में वर्णित है कि कलयुग की शुरुआत भगवान कृष्ण के पृथ्वी छोड़ने के बाद हुई।इन ग्रंथों में यह भी बताया गया है कि कलयुग के अंत में कल्कि अवतार आएंगे जो कलयुग को समाप्त करके पुनः सतयुग की स्थापना करेंगे।कलयुग का वर्णन विभिन्न हिंदू ग्रंथों में मिलता है, जो इसे विस्तार से समझाते हैं।