भारत में रेल का विकास 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुआ। पहली रेलगाड़ी 16 अप्रैल 1853 को मुंबई (तब बॉम्बे) से ठाणे के बीच चलाई गई, जो 34 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। इस रेल सेवा का उद्देश्य मुख्य रूप से ब्रिटिश शासन के आर्थिक और प्रशासनिक हितों को साधना था, जैसे कच्चे माल का परिवहन और सैनिकों की आवाजाही।
इसके बाद, ब्रिटिश सरकार और निजी कंपनियों ने मिलकर रेल नेटवर्क का विस्तार किया, जिससे भारत के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने में मदद मिली। 19वीं सदी के अंत तक, भारत में एक विस्तृत रेल नेटवर्क बन चुका था, जो देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा।
स्वतंत्रता के बाद, भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण हुआ और इसे एक संगठित ढांचे के तहत लाया गया। आज भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जो लाखों लोगों को रोज़ाना परिवहन सेवा प्रदान करता है और देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।