General Knowledge

मनुष्य के मरने के बाद उसके शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग समय तक जीवित रह सकते हैं। अंगों के जीवित रहने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर को कितनी जल्दी ठंडा किया जाता है और अंगों को कितनी जल्दी पुनः प्रत्यारोपित किया जाता है। यहां प्रमुख अंगों और उनके जीवित रहने के समय का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

मस्तिष्क (Brain):

मस्तिष्क की कोशिकाएँ ऑक्सीजन की कमी के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं और मृत्यु के लगभग 4-6 मिनट बाद मरने लगती हैं। इसीलिए मस्तिष्क को बहुत जल्दी क्षति पहुँचती है।

हृदय (Heart):

हृदय को मृत्यु के 4-6 घंटे तक प्रत्यारोपित किया जा सकता है यदि इसे सही तापमान पर संरक्षित किया जाए।फेफड़े (Lungs): फेफड़े भी मृत्यु के 4-6 घंटे बाद तक प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त रहते हैं।

यकृत (Liver):

यकृत मृत्यु के 12-24 घंटे बाद तक प्रत्यारोपण के लिए जीवित रह सकता है, यदि इसे सही तरीके से संरक्षित किया जाए।

गुर्दे (Kidneys):

गुर्दे मृत्यु के 24-36 घंटे बाद तक प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।अग्न्याशय (Pancreas): अग्न्याशय भी लगभग 12-24 घंटे तक प्रत्यारोपण के लिए जीवित रह सकता है।

आँखों की कॉर्निया (Corneas):

आँखों की कॉर्निया मृत्यु के 24 घंटे बाद तक प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त रह सकती हैं।

त्वचा और हड्डियाँ (Skin and Bones):

त्वचा और हड्डियाँ मृत्यु के 24 घंटे बाद तक प्रत्यारोपण के लिए संग्रहित की जा सकती हैं और विशेष परिस्थितियों में संरक्षित रहने पर और भी अधिक समय तक जीवित रह सकती हैं।ये समय सीमाएँ अनुमानित हैं और इन्हें अंगों के संरक्षण और परिवहन की परिस्थितियों के आधार पर बदला जा सकता है। अंगों का प्रत्यारोपण एक जटिल प्रक्रिया है और इसे समयबद्ध और अत्यंत सावधानीपूर्वक करना आवश्यक है ताकि अंग स्वस्थ और कार्यशील बने रहें।

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