General Knowledge

आकाश में इंद्रधनुष (Rainbow) बनने की प्रक्रिया प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन और प्रकीर्णन के कारण होती है। यहाँ संक्षेप में यह प्रक्रिया वर्णित है:

प्रकाश का अपवर्तन (Refraction):

जब सूर्य की किरणें बारिश की बूँदों पर गिरती हैं, तो वे बूँद के अंदर प्रवेश करते समय अपने मार्ग को बदल लेती हैं। यह प्रक्रिया अपवर्तन कहलाती है। सूर्य का प्रकाश सफेद होता है और इसमें विभिन्न रंग होते हैं, जो अलग-अलग तरंग दैर्ध्य (wavelength) के होते हैं। अपवर्तन के दौरान, ये रंग अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं।

प्रकाश का परावर्तन (Reflection):

बूँद के अंदर पहुंचने के बाद, प्रकाश की किरणें बूँद की भीतरी सतह से टकराती हैं और वापस परावर्तित होती हैं। यह आंतरिक परावर्तन होता है।दूसरा अपवर्तन: बूँद से बाहर निकलते समय, प्रकाश की किरणें फिर से अपवर्तित होती हैं। इस बार भी, विभिन्न रंग अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं, जिससे वे अलग-अलग दिशाओं में फैल जाते हैं।इन प्रक्रियाओं के कारण, सफेद प्रकाश के विभिन्न रंग बूँद से अलग-अलग दिशाओं में बाहर निकलते हैं, जिससे एक रंगीन स्पेक्ट्रम बनता है। यह स्पेक्ट्रम हमें इंद्रधनुष के रूप में दिखाई देता है।

इंद्रधनुष में सामान्यतः सात मुख्य रंग होते हैं: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और बैंगनी।

इंद्रधनुष बनने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँसूर्य की स्थिति:

इंद्रधनुष बनने के लिए, सूर्य क्षितिज के अपेक्षाकृत नीची स्थिति में होना चाहिए, लगभग 42 डिग्री से कम ऊँचाई पर।बारिश की बूँदें: आकाश में बारिश की बूँदों का होना आवश्यक है। जब सूर्य की किरणें इन बूँदों पर गिरती हैं, तो इंद्रधनुष का निर्माण होता है।दृष्टिकोण: देखने वाले व्यक्ति की पीठ सूर्य की ओर होनी चाहिए, और सामने बारिश होनी चाहिए।इस प्रकार, इंद्रधनुष एक अद्भुत प्राकृतिक घटना है, जो प्रकाश के अपवर्तन, परावर्तन और प्रकीर्णन के कारण बनती है और हमें विभिन्न रंगों का सुंदर दृश्य प्रदान करती है।

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