बच्चों के शरीर में मां-बाप के लक्षण आनुवांशिकता (genetics) के माध्यम से जाते हैं। यह प्रक्रिया मुख्यतः जीनों के स्थानांतरण और मिलान के आधार पर होती है। संक्षेप में इसे इस प्रकार समझा जा सकता है:
1. डीएनए और जीन (DNA and Genes)डीएनए (DNA):
डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) एक लंबी, दोहरी श्रृंखला है जो प्रत्येक कोशिका के नाभिक में पाई जाती है। इसमें हमारी आनुवंशिक जानकारी होती है।जीन (Genes): डीएनए के छोटे-छोटे हिस्से जीन कहलाते हैं, जो विशिष्ट लक्षणों और गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
2. गुणसूत्र (Chromosomes)मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से आधे पिता से और आधे माता से आते हैं। इसलिए, प्रत्येक बच्चा अपनी आनुवंशिक सामग्री का आधा हिस्सा अपने पिता से और आधा हिस्सा अपनी माता से प्राप्त करता है।
3. आनुवंशिक विरासत (Genetic Inheritance)संयोजकता (Combination):
जीनों का संयोजन बच्चे में विशिष्ट लक्षणों का निर्माण करता है। यह संयोजन अनूठा होता है, इसलिए हर बच्चा अपने माता-पिता से भिन्न और अनोखा होता है।प्रभुत्व (Dominance): कुछ जीन प्रभुत्व वाले होते हैं, अर्थात् वे दूसरे जीनों पर हावी होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी एक माता-पिता से हावी जीन और दूसरे से अवरुद्ध जीन (recessive gene) मिलता है, तो हावी जीन के लक्षण प्रकट होते हैं।
4. जीनों का कार्य (Function of Genes)शारीरिक लक्षण:
बालों का रंग, आंखों का रंग, ऊंचाई, त्वचा का रंग, आदि जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं।व्यवहारिक और मानसिक लक्षण: कई बार बच्चों के व्यवहार और मानसिक लक्षण भी जीनों द्वारा प्रभावित होते हैं, जैसे बुद्धिमत्ता, स्वभाव, आदि।
5. म्यूटेशन (Mutations)कभी-कभी जीन में प्राकृतिक रूप से बदलाव (mutation) हो सकते हैं, जिससे नई विशेषताएं उत्पन्न हो सकती हैं। ये बदलाव भी अगले पीढ़ी में जा सकते हैं।निष्कर्षबच्चों में मां-बाप के लक्षण डीएनए और जीनों के माध्यम से आते हैं। गुणसूत्रों का संयोजन, जीनों का प्रभुत्व, और कभी-कभी होने वाले म्यूटेशन इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि बच्चे अपने माता-पिता से शारीरिक और व्यवहारिक लक्षण विरासत में पाते हैं।