झारखंड में बाढ़ नहीं आने के पीछे कई कारण हैं:
भौगोलिक स्थिति: झारखंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसमें ऊँचाई वाले इलाके अधिक हैं। यहाँ पहाड़ियाँ और पठार अधिक हैं, जिससे बारिश का पानी तेजी से बहकर निकल जाता है और निचले इलाकों में पानी जमा नहीं हो पाता।
नदियों का स्वरूप: झारखंड में नदियाँ अपेक्षाकृत छोटी और तेज बहाव वाली हैं। ये नदियाँ बरसात के पानी को जल्दी निकाल देती हैं और बड़े नदियों के मुकाबले इनमें बाढ़ का खतरा कम होता है।
वर्षा वितरण: झारखंड में वार्षिक वर्षा वितरण समान रहता है, जिससे अचानक अत्यधिक पानी का बहाव नहीं होता। यहाँ की वर्षा नियंत्रित होती है, जिससे बाढ़ की संभावना कम रहती है।
जमीन की संरचना: झारखंड की मिट्टी और भू-आकृति जल निकासी के अनुकूल है। यहाँ की मिट्टी और पत्थरीली जमीन पानी को तेजी से सोख लेती है, जिससे बाढ़ की स्थिति नहीं बनती।
मानव निर्मित अवरोधों की कमी: झारखंड में बड़े-बड़े बांध और नहरें कम हैं, जो अन्य राज्यों में बाढ़ का कारण बन सकते हैं। यहाँ जल निकासी की प्राकृतिक व्यवस्था अधिक प्रभावी है।
इन कारणों से झारखंड में बाढ़ की घटनाएँ दुर्लभ हैं और राज्य बाढ़ की समस्याओं से अपेक्षाकृत मुक्त रहता है।